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मंगलवार, 30 नवंबर 2010

जब हनुमान जी घर मेरे आए ....पंजाब यात्रा संस्मरण -५..jha ji on ride










इससे पहले आप मेरी पंजाब यात्रा में इन पोस्टों पर पढ चुके हैं कि मैं कहां कहां कैसे कैसे घूमा । आज मैं आपको मिलवाता हूं हनुमान जी से ..अरे नहीं नहीं यूं तो भारत में हनुमान जी से मुलाकात ..अपने किसी परिचित अंजाने से मुलाकात से ज्यादा आसान है ...क्योंकि उसके लिए आपको किसी फ़्लैट नंबर , किसी ब्लॉक नंबर , किसी गली आदि की पहचान की जरूरत नहीं है ..हर जगह से समान रूप से अवेलेबल हैं ..। खैर हम , तो आज आपको मिलवा रहे हैं साक्षात हनुमान जी से । जी हां पंजाब होशियारपुर में दशहरे की एक प्रचलित प्रथा । पंजाब के होशियारपुर में प्रचलित रिवाज़ के अनुसार ..उन दस दिनों में शहर में मौजूद कम से कम चालीस हनुमान दल ..आम लोगों के ..अपने भक्तों के घर जाते हैं ..वहां कीर्तन भजन करते हैं और फ़िर सबको आशीष देते हुए चले जाते हैं फ़िर अगले बरस आने के लिए । और हां ये हनुमान दल कोई आम कीर्तन दल की तरह नहीं होता है । इसमें हनुमान बने युवक को चालीस दिनों तक कठिन उपवास रखने के अलावा एक बहुत लंबा और बहुत ही भारी मुकुट पहनना होता है तथा पूरे श्रद्धा और विश्वास से भक्ति में लीन रहना होता है । और फ़िर शिव जी की बारात की तरह तमाम गण उपगणों के साथ हनुमान जी का दल भक्तों के घरों में जाते हैं । इसके लिए बाकायदा हनुमान जी को अपने घर पर आमंत्रित करना होता है । तो ऐसे ही एक हनुमान जी से मिले हम अपने साढूं साहब के घर पर ..आप भी मिलिए



सबसे पहले घर को अच्छी तरह से झाड पोंछ कर स्वच्छ किया जाता है , उसके बाद कीर्तन की तैयारी होती है ...देखिए बुलबुल को कीर्तन स्थल पर धमाचौकडी करते हुए


और फ़िर कीर्तन के लिए जुटे आस पडोस के लोग

कीर्तन जम रहा है ...........



और ये पहुंचा हनुमान दल , खूब ढोल नगाडे बजाते हुए


स्वागत की तैयारी भक्त के घर द्वार पर


लीजीए हनुमान दल तो आ ही पहुंचा नजदीक


और ये एक बाल हनुमान का रूप धरे हुए बच्चा


अपनी कला का प्रदर्शन करता हुए दल के युवक


और देखिए ..

और ये लंबे मुकुटधारी हनुमान जी भी आ पहुंचे



घर के अंदर विश्राम करते हुए हनुमान जी और दल कीर्तन करता हुआ


सब हनुमान जी से आशीष लेते हुए ...


शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

अब जरा ये भी पढ ही डालिए कि रोहतक तिलियार ब्लॉगर्स बैठक में हुआ क्या था .....a last report by ...jha ji ...







वैसे तो रोहतक तिलियार की ब्लॉगर बैठक के बारे में , उस दिन ब्लॉग बैठक में हुई बातचीत , विमर्श के अलावा बांकी सब कुछ आप पढ ही चुके हैं , अरे बल्कि इतना पढ चुके हैं कि ...बस एक पेशेवर ब्लॉगर ही इतना झेल सकता है ..वरना टहलुआ ब्लॉगर तो दूर से ही बिदक के निकल लिया होगा ...ये सोच कर अबे छोडो ..तिलियार झील का नाम सुन के तो अब आत्महत्या करने को कर रहा है ...खैर ये उनकी राय हो सकती है । मगर मुझे लगा कि इस ब्लॉग बैठक की सभी रिपोर्टों को अब तक पाठकों को वो सब पता चल गया जो कि सुबह ११ बजे से पहले और शाम चार बजे के बाद हुआ था , मगर बीच में ब्लॉगर क्या कहते सुनते रहे ये नहीं पता चल पाया है तो इसके बावजूद कि ब्लॉगर बैठक की एक और रिपोर्ट ...उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ नहींईईईईईई ....लीजीए पढ जाईये । लेकिन एक बात बताईये ...ब्लॉगर ब्लॉग की बात नहीं करेगा तो दूसरा उसकी बात कैसे करेगा और जब ब्लॉगर ..ब्लॉग की बात करेगा तो ब्लॉगर बैठक की बात भी करेगा और जब ब्लॉगर बैठक की बात करेगा तो रिपोर्ट तो लिखनी ही पडेगी न ..



जहां तक मुझे याद है कि उस दिन जब हम वहां पहुंचे तो भाई ललित शर्मा जी ने , अंतर सोहिल जी ने , नीरज जाट जी और अन्य मित्रों ने बडी ही गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया और हम बढ चले इस सेमिनार हॉल की तरफ़ .
..बताईये किसी ने बताया दिखाया आपको कि सेमिनार हॉल में ही ब्लॉगर बैठक हुई थी , इसके बाहर जो भी हुआ वो कम से कम किसी ब्लॉगर बैठक का हिस्सा नहीं था , क्योंकि मुझे याद है कि खुद कम से कम तीन बार ...लघुशंका हेतु बाहर गया था ..और मेरे ख्याल से शायद डॉ प्रवीण जी मुझे वहां दिखे थे ...। तो सेमिनार हॉल में हमें राज भाटिया जी , डॉ अकेला , और अन्य मित्रगण बैठे मिले , सभी ब्लॉगर मित्रगण एक दूसरे को अपना नाम बता कर आभासी रिश्ते को महसूस कर रहे थे ।

रास्ते में ही हमें सूचना मिल चुकी थी कि भाई राजीव तनेजा जी भाभी संजू तनेजा जी , प्रख्यात ज्योतिषविद ब्लॉगर संगीता पुरी जी और ब्लॉग जगत पर अपने स्नेह की छाया बिखेरती निर्मला कपिला जी बस पहुंचने वाले हैं और भाई अलबेला जी हवा में टंग के उतरने के बाद रास्ते में कहीं टंगे पडे हैं । सबसे पहले शाहनवाज भाई ने लपक कर लैपटॉप के अंदर करंट छोड दिया ताकि वो फ़ौरन उर्जावान हो जाए । और खुशदीप भाई जो कार से उतरते हुए आस्तीन समेटी थी उसका कारण मुझे तब समझ में आया जब खुशदीप भाई ने लैपटॉप की आत्मा को बस पलक भर के लपलपाते देखा कि फ़ट से जम गए और कहा कि यार ये टाईपिंग करते हुए ये आस्तीनें बहुत तंग करती हैं ....और बस वो पहली वाली रिपोर्ट तो याद है न ..नुक्कड पे अरे इस पोस्ट के साथ एक और मजेदार बात हुई थी ...पहला कमेंट करने के लिए निर्मला कपिला जी को पकडा दिया गया ..अब चूंको खुशदीप भाई ऑलरेडी लॉगिन थे इसलिए ..जब वो टिप्पणी छपी तो लिखा हुआ या ...बेटा ये ब्लॉग बैठक ...और ऐसा ही कुछ ...टिप्पणीकार कौन ...खुद भाई खुशदीप ...हा हा हा हा हा । बस फ़ौरन से पेशतर खुशदीप भाई ने लैपटॉप लिया ..और देशनामा को गोद में ही लिए रहे ..पूरे ब्लॉग बैठक के दौरान ।

मगर एक और खूबसूरत बात उन्होंने ये की कि , किस ब्लॉगर ने क्या कहा ये लिखने नोट करने की जगह उसे टाईप करना शुरू कर दिया ..अजी छोडिए छोडिए ..कोई ब्लॉग सेवा नहीं चल रही थी ...ये थी वो दूसरी पोस्ट ...खुशदीप भाई के देशनामा पर ।


सबसे पहले बैठे हुए थे डॉ अकेला , जिन्होंने बताया कि उनका ब्लॉग सफ़र अभी उतना लंबा नहीं है और जो कुछ उन्होंने लिखा था अब तक वो अनछुआ सा है और अब जाकर वे उसे दोबारा हमारे बीच ले कर आएंगे । इसी बीच उधर से खुशदीप भाई ने सबके लिए एक एक शर्त रख दी कि सबको अपनी एक कमजोरी भी बतानी होगी .मैं सोच रहा था कि यदि ..किसी ने जानना चाहा कि क्या उन्हें छापा जाएगा .....तो मैं फ़ौरन ही कहूंगा ..अमां कमाल है यार ....वे तो हाईलायटेड स्टफ़ होगा भाई पाठको के लिए ...उधर से अगली सलाह हमारे मुंह से टपक पडी कि ....आपने ब्लॉग्गिंग में आने से पहले और अब आने के बाद किस तरफ़ का अंतर महसूस किया है ...कोई जरूरी नहीं है कि खुद महसूस किया हो ....कई बार तो जबरन महसूस कराया गया ..बाई गॉड सच्ची यार ...हालांकि मैं तो बस इस ख्याल से ये विचार दे बैठा था कि ...यार कोई तो होगा जो ...ब्लॉग्गिंग के चक्कर में घर में ..बीवी के जूते ..मेरे से ज्यादा खाता होगा ..जो भी मिल गया ,उसी दिन से ..उसकी रीडरशिप सबस्क्राईब ...हर पोस्ट पर पहली टिप्पणी का बॉड भर के दे दूंगा ....आदि आदि टाईप के सारे जज्बात उडॆल दूंगा ...। तो बस सभी ने उसका उत्तर दिया । सबसे पहले खुशदीप भाई ने अपनी कमी बता दी ..अब मैं समझ गया कि सोचा होगा ..अबे चलो ये वाली कमी मैं ही बता देता हूं ..फ़र्स्ट फ़र्स्ट ...इत्ता बडा सर्कल बना हुआ है इन ब्लॉगर्स का ..क्या पता मेरी वाली कमजोरी कोई पहले ही बता दे ..अपना नंबर आने तक क्या पता सारी फ़ेवरिट वाली कमजोरियां हाथ से ही निकल जाएं ..सो दन्न से बोले कि ..हमे अपनी पोस्ट पर जब कोई टेढी टिप्पणी करता है तो हमारा भी खोपडा भन्ना जाता है फ़िर तो ..अबे चलो ..इत्ती मेहनत के बाद ..ऐसी बात ...तो मतलब कि ...गुस्सा आ जाता है ....ये तो सबकी कमी मानी जाएगी ..कसम से ब्लॉगर्सली (युनिवर्सली टाईप ) कमजोरी हो गई ये । हालांकि अभी मुझे सबकी बताई कमी ध्यान भी नहीं है कसम से ..अरे कुछ भूलूंगा भी कि नहीं ...

अब भाई नरेश सिंह राठौड जी का नंबर आ गया और उन्होंने ब्लॉगिंग में अपने आने का जो अनुभव सुनाया सुनकर शायद आपके रोंगटे खडे हो जाएं । उन्होंने बताया कि , कुछ वर्षों पहले वे नौकरीपेशा थे । एक दिन काम के दौरान उन्हें कंप्यूटर संबंधित कोई काम सौंपा गया , उन्होंने अपने समझ के मुताबिक उसे ठीक करने की कोशिश की । जाने कैसे भूलवश उसके कारण , अचानक शनिवार को काम रुक गया और फ़िर अगले दिन रविवार होने के कारण ठ्प्प पडा रहा । उन्हें अपरोक्ष से बताया कि पिछले डेढ दिनों में वहां उस बंदी के कारण हुए नुकसान का कारण उन्हें माना समझा जा रहा है और उसके बाद उन्होंने वो नौकरी छोड दी । उनका कंप्यूटर तकनीक से लगाव और उसके बाद ब्लॉग्गिंग में आना इसके बाद का ही किस्सा है । मैंने अपना नाम बताने के बाद अंत में ही कुछ कहने का आग्रह किया । इसके बाद ललित जी ने मोर्चा संभाला उन्होंने सबसे पहले बताया कि वे पिछले दिनों कोटा श्री दिनेश राय द्विवेदी जी , श्री अखतर खान अकेला जी से मुलाकात करते हुए ." वरिष्ठ बजकर्मी " इंदु पुरी जी के पुत्र के विवाह में सम्मलित हो कर यहां पधारे हैं । उन्होंने बताया कि , ब्लॉगिंग विशेषकर हिंदी ब्लॉग्गिंग एक वैश्विक परिवार की तरह से हो गया है । जिस अपनेपन और स्नेह से इंदु पुरी जी मिलीं उसका गवाह तो वो आंसू का कतरा थे जो चार जोडी नेत्रों से बह निकले थे । ललित भाई ने बताया कि , इंदु पुरी जी ने ब्लॉगर बारातियों के लिए अलग से ही ब्लॉगर ठिकाना ही बना दिया था ...यहां तक कि सीढीयां और दीवारें तक ब्लॉगर्स के स्वागत में बिछी हुई थीं
इंदु पुरी जी के घर का दृश्य ..पद्म सिंह सी जी के बज से उडाई गई एक फ़ोटो

...बताईये देखा था अब तक आपने ये दीवानापन ....गौर से पढियेगा ...उनसे खास गुजारिश है जिन्हें ब्लॉगर बैठकों में सार्थकता नहीं मिल पाती ...। इसके बाद उन्होंने बताया कि बहुत जल्दी ही वे छत्तीसगढ में ब्लॉगर और मीडिया को आमने सामने लाने जैसा कोई सम्मेलन आयोजित किए जाने का विचार बना रहे हैं । संगीता पुरी जी ने बताया कि वे ब्लॉगजगत में अपने विषय को लेकर गंभीरता से लिखती हैं और अपने पिताजी द्वारा सीखे गए गत्यात्मक ज्योतिष को अंतर्जाल पर रख रही हैं । संगीता जी ने बताया कि अब किसी भी शहर लगता है कि एक आध ब्लॉगर से मुलाकात तो हो ही जाएगी इसलिए अब कोई शहर अनजाना नहीं लगता ।

भाई राजीव तनेजा जी और भाभी संजू तनेजा ने भी अपने अपने अनुभव बांटे । इसके बाद निर्मला कपिला जी ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत ब्लॉग्स को पढने में आती है , जब से ब्लॉगवाणी बंद हुआ है उन्हें काफ़ी दिक्कत आई है । यहां मैं एग्रीगेटर्स और ब्लॉग पढने लिखने के विषय में कुछ कहा जो मैं आखिर में ही एक साथ बताता हूं । उन्होंने बताया कि उनके दामाद जी इसमें उनकी बहुत मदद करते हैं । हमने मन ही मन सोचा कमाल है ..एक हमारी सास है ब्लॉग्गिंग में हमारी सहायता लेना तो दूर घर पर आती हैं ..तो कंप्यूटर को देखते हुए ...आंखों ही आंखों में ये कहती हैं ...अच्छा तो ये है मुंई वो मुन्नी ..जिसके लिए ..दामाद जी हमारी ..बिटिया रानी को ...दरकिनार किए रहते हैं ..नाम क्या है DELL.....हुंह ...अंग्रेज मुईं ।इसके बाद डॉ अरुणा कपूर ने भी अपने अनुभव बांटे और बताया कि जायका के नाम से वे टिप्पणी करती रही हैं ।

इसके बाद भाई संजय भास्कर और भाई हरदीप राणा ने अपनी अपनी बात कही । अब सामने थे योगेन्द्र मौदगिल जी ,उनका परिचय दिया भाई सतीश सक्सेना जी ने , वो चार जादुई पंक्तियां आप बहुत बार सुन ही चुके हैं और फ़िर उनसे आग्रह किया कि वे कुछ सौगात हमें भी दें अपनी कविताओं गज़लों का , उन्होंने कहा कि परिचय के इस दौर के खत्म होने के बाद वे जरूर ये फ़रमाईश पूरी करेंगे । इसके बाद सतीश भाई ने भी अपने अंदाज़ में अपनी बातें कहीं । इसके बाद डा प्रवीण चोपडा जी ने भी अपने ब्लॉगिंग के अनुभव को साझा किया और उन्हीं कठिनाईयों का जिक्र किया । इसके बाद केवल राम जी ने बताया कि उनका विषय भी हिंदी ब्लॉग्गिंग है और वे बडी ही बारीकी से इसकी सभी गतिविधियों पर नज़र रखे हुए हैं ।

अंतर सोहिल ने बडी ही दिलचस्प बात कहते हुए कहा कि अब ब्लॉग्गिंग में आने के कारण वे सार्वजनिक से हो गए हैं इसलिए हठात कोई बुरा काम करने से खुद को बचा लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके बारे में तो सबको पता है फ़िर ..है न दिलचस्प बात । इसके बाद राज भाटिया जी ने अपने शुरूआती अनुभवों को बांटा और सबके स्नेह से गदगद हो गए ।जहां तक मेरी बात है तो मैंने जो बात कही वो ये कि मैं ब्लॉग पोस्ट पढने के लिए सबसे ज्यादा डैशबोर्ड का ही इस्तेमाल करता हूं । और मेरे ख्याल से हम सबके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक अपनी बात को पहुंचाया जाए इसके लिए वर्तमान में मौजूद एग्रीगेटर्स पर खुद को पंजीकृत करना चाहिए ताकि कल को यही एग्रीगेटर मजबूत विकल्प के रूप में उभर कर सामने आएं । इसके बाद योगेन्द्र जी ने जो समां बांधा तो फ़िर तो सेमिनार हॉल ठहाकों से गूंज उठा ।इसके बाद भोजन का समय हो गया और सब शुरू हो गए ।

भोजन के दौरान और उसके बाद भी सब छोटे छोटे गोले में बैठ कर विचार विमर्श करते रहे ।

हमारा मोबाईल बीच बीच में तार द्वारा शाहनवाज भाई के लैपटॉप से गठबंधन करता रहा ताकि खुशादीप भाई द्वारा तैयार पोस्ट में फ़ोटुएं भी आपको दिखाई जाएं । भोजन के उपरांत सबने थोडी हल्की फ़ुल्की बात की और राज भाई के आग्रह पर तिलियार झील परिसर घूमने निकल गए ।
निर्मला जी ने कहा कि वे इतनी दूर तक नहीं चल सकेंगी क्योंकि उनके पैरों में दर्द था । हम सब घूमते निहारते रहे ।







कौन कहता है कि ताऊ नहीं थे वहां , पूरे दलबल के साथ थे




बीच में राजीव भाई के फ़ोन पर संदेश आया और हम चल दिए वापसी की ओर ।

वापसी में योगेंद्र जी ने अपनी अपनी गज़लों और गीतों का संग्रह अंधी आंखें गीले सपने की प्रति सप्रेम हमें भेंट की

। हम सतीश भाई की कार से डा. दराल सर के घर की ओर चल दिए ...

तो ये थी तिलियार की एक वो रिपोर्ट जो अब तक आप तक नहीं पहुंची थी ....चलिए कल से फ़िर पुराने सफ़र पर लौट सकूंगा ..

इस बैठक की सबसे शानदार फ़ोटुएं ..सतीश भाई ने अपने कैमरे से खींची थी और बहुत सी तो ऐसी कि ब्लॉगर प्रोफ़ाईल पर लगाई जा सके ..यहां देखिए न

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

हिंदी पोस्टों/ ब्लॉगर्स के प्रति केवल एक नॉन ब्लॉगर ही निष्पक्ष रह सकता है ...दिल्ली से तिलियार ..एक कार सफ़र विमर्श ..रिपोर्ट नं १


इस बार , वर्षांत पर लगता है ब्लॉगर्स का मेला लगा ही रहेगा अभी । पिछले रविवार को ही समीर लाल जी उर्फ़ उडनतश्तरी जी के सान्निध्य में सभी को उन्हें जानने बैठने का मौका मिला था । अब अब राज भाटिया जी ने इस रविवार यानि परसों सभी को रोहतक बुला भेजा । मेरे लिए तो इन सम्मेलनों में हिस्सा लेना ऐसी बैठकों में शिरकत करने का आदेश उसी तरह से होता है जैसे कि एक फ़ौजी को फ़्रंट पर पहुंचने के लिए आदेशित किया जाता है । हालांकि इधर कुछ दिनों से कार्यालय और घर पर भी व्यस्तता का आलम कुछ ऐसा बना हुआ है कि समझ ही नहीं आ रहा कि कब सुबह हो रही है और कब शाम । तो इससे पहले कि मैं इस बैठक की रिपोर्ट की तरफ़ बढूं , कुछ और सूचनाएं भी आपको देता चलूं । संभावना है कि अगले महीने किसी तारीख को एक और कार्यक्रम दिल्ली में ही आयोजित किया जाए अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है होते ही सूचना दी जाएगी । और एक निजि सूचना मेरी तरफ़ से ये कि मैं इस साल के अंतिम दिनों में शायद छत्तीसगढ की पवित्र भूमि के दर्शन कर सकूंगा ।खैर, ये सब तो भविष्य की बातें हैं अभी तो आप रोहतक झील चलिए मेरे साथ ।

इस कार्यक्रम की सूचना मिलते ही सभी वहां पहुंचने की तैयारी में लग गए थे । इससे संबंधित कई मजेदार बातें हुईं जो मैं आपको इस रिपोर्ट की आखिरी किस्त में बताऊंगा । आखिरकार हुआ ये कि मुझे खुशदीप भाई ने आदेश दिया कि मैं , उनके और सतीश सक्सेना जी के साथ चल रहा हूं और मैं शनिवार शाम को उनसे बात कर लूं । मगर किन्हीं कारणों से मेरी बात नहीं हो पाई सतीश जी से । सुबह सुबह जब फ़ोन पर देखा कि सतीश जी की टिप्पणी ब्लॉगवार्ता पर आई है तो मुझे पता चल गया कि वे जगे हुए हैं और कंप्यूटर पर हैं , पूछने पर पता चला कि वे बस निकलने वाले हैं । मुझे अभी समय लगने का अंदेशा था सो उनसे आगे बढने को कहा । मगर उन्होंने और खुशदीप भाई ने कहा कि वे कुछ देर प्रतीक्षा कर लेंगे , मेरे बताए किसी स्थान पर । अब मैं फ़टाफ़ट तैयार होकर निकलने की तैयारी में लग गया । घर पर गांवे से आये कुछ मेहमान और बच्चे सभी सो रहे थे । नहाने धोने के बाद आलमारी से कपडे निकालने के बजाय मुझे अभी दो दिन पहले निकाला और शादी समारोह में पहना गया अपना सूट दिख गया मैं भी बिना सोचे उसे टांग कर चलता बना । मुझे क्या पता था कि इन कपडों के चक्कर में मेरी तगडी खिंचाई होनी है बाद में ।

मैंने खुशदीप भाई और सतीश सक्सेना जी को जिस स्थान पर रुकने के लिए कहा था जरा उस स्थान के बारे में भी जान लें । दिल्ली के गीता कॉलोनी के पास स्थित ..शमशान घाट के पास । अब मैंने सोचा कि शमशान घाट ही वो स्थान है जिसे ढूंढना ज्यादा मुशकिल नहीं होता ..(.यदि आप न भी ढूंढें तो किसी न किसी दिन तो पहुंच ही सकते हैं ) और जब सतीश जी ने देखा कि वो कौन सी जगह है तो बेसाख्ता हंस पडे । अगली सीट पर खुशदीप भाई और सतीश सक्सेना जी विराजमान थे और पिछली सीट पर देखा तो ...अरे ये तो अपने शाहनवाज़ भाई निकले ..वो भी अपने लैपटॉप और नेट के साथ । बस अब हम निकल चले । जहां चार यार ....चार ब्लॉगर्स हों और वहां ब्लॉगिंग की बात न हो ऐसा भला हो सकता है क्या ? हालांकि हमारी बातचीत शुरू हुई , पिछले कुछ दिनों से ब्लॉगर साथियों के निजि जीवन में घट रही दुखद घटनाओं से हुई और फ़िर सबने ये महसूस किया कि अब भी जो सामाजिक अपनापन , जो आपसी स्नेह , जो सहभागिता छोटे गांवों , कस्बों में देखने समझने को मिलती हैं अब वो बात शहरों में कहां ??

यहां बात बात में खुशदीप भाई ने जिक्र किया अपने होनहार भतीजे करन के बारे में । उन्होंने उसकी काबलियत और खूबी के बारे में बताते हुए बहुत सी ऐसी जानकारियां दीं जो न सिर्फ़ मेरे लिए बल्कि हम सभी के लिए नई और अनोखी थी ।


उनका होनहार भतीजा ..carbon credit ..विषय पर मास्टर्स डिग्री ले रहा है । हमारे लिए ये शब्द ही बिल्कुल नया था । जब जानना चाहा तो सतीश सक्सेना जी और खुशदीप सहगल जी ने बताया कि , पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जो वैश्विक उपाय अपनाए जा रहे हैं उनमें से एक है carbon credit ..| असल में ये कार्बन क्रेडिट एक तरह का बोनस प्वाइंट जैसा है ,,यानि जो भी औद्योगिक , रिहायशी ईकाई ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाएंगी , जितनी भी कमी वे ला सकेंगे उसके अनुसार उन्हें ये कार्बन क्रेडिट दिया जाएगा और इन वैश्विक क्रेडिट को बाद में आर्थिक फ़ायदे में बदला भी जा सकता है यानि जिसके पास इन क्रेडिट की कमी है उन्हें ये क्रेडिट प्वाइंट बेचा जा सकेगा । इसका मतलब ये हुआ कि भारत सहित तमाम विकासशील और पर्यावरण में संतुलित देश इस कार्बन क्रेडिट से बहुत कुछ पा सकेंगे । है न कमाल की बात । इससे आगे , इसके बारे में भाई खुशदीप सहगल ही अपनी किसी पोस्ट में बताएं तो बेहतर होगा ।

इसके बाद बात घूमफ़िरकर मेरे ऊपर आ गई और सतीश सक्सेना जी ने फ़िर टिप्पू चाचा को याद किया । उन्होंने बडे ही विश्च्वास के साथ कहा कि मैं मानूं या न मानूं मगर लोग अब भी मानते हैं कि टिप्पू चाचा नाम का आभासी चरित्र मैं ही थी । और मुझे पुन: विस्तार से बताना पडा कि किस तरह से मुझे टिप्पू चाचा के साथ जुडने का आमंत्रण मिला और फ़िर बाद में किन परिस्थितियों में उनका वो साझा ब्लॉग छोडना पडा क्योंकि मुझे नकाब के भीतर बैठे किसी ब्लॉगर से कोई शिकायत नहीं , तब तक , जब तक कि उसकी मंशा नकारात्मक न हो । चाहे वो जलजला हों , अम्मा जी , उस्ताद जी हो , या फ़िर कि आजकल दिख रही मुन्नी बदनाम हो । मैंने दो बातें कहीं जो मैंने अब तक ऐसे अनुभवों से जान व महसूस कर चुका था , पहली बात ये कि , इन तमाम मुखौटों के पीछे कोई न कोई पके पकाए खांचे ही थे , वर्ना ऐसा कम ही हुआ था कि , कोई मासूम आते ही मासूमियत से भरा हुआ चेहरा लेकर पूरे ब्लॉगजगत की पोस्टों का उद्धार करता फ़िरे । दूसरा और ज्यादा दमदार निष्कर्ष ये कि कोई लाख गंगा जमुना में घुसकर कहे , चाहे सच का सामना की गद्दी पर बैठ कर बोलता हो कि ....हम तो निष्पक्ष हैं .....मगर यदि वो खुद ब्लॉगर है तो ...........तो ये हो ही नहीं सकता , जैसा कि कई लोग बाग दावियाते देखे पाए गए हैं । वैसे यहां मुझे एक बात समझ नहीं आई कि , दिखाने वाले देर सवेर यहां , अपनी पोस्टों, टिप्पणियों से अपनी औकात दिखाने वाले सभी जब अपने चेहरे के साथ ही ये सब कर लेते हैं , पा लेते हैं तो फ़िर अब इससे कितने ज्यादा के लिए मुखौटा पहनते हैं , । और इसी कारण से फ़िर एक दिन मुझे मजबूर होकर टिप्पू चचा नामक जिनियस ( जी हां इतना तो एहसास है मुझे कि वो कोई न कोई जिनियस ही था, या कि है )से अपनी साझेदारी को हटाना पडा क्योंकि मैं उन दिनों वहां लिखी जा रही कई टिप्पणियों का साझेदार नहीं बनना चाहता था । और इन सब बातों के बीच हम रास्ता नापते रहे ..बीच में पडे ..अरे कहां पर ..अरे क्या था यार वो ...हां बहादुरगढ ...में मशहूर बिल्लू के पकौडे भी स्क्रिप्ट में आने के हकदार हो रहे थे ।



हम तिलियार के करीब पहुंचने को थे .......................अरे आज नहीं कल पहुंचते हैं न ....






हम रिपोर्ट तैयार करने का मूड बनाते हैं









सोमवार, 22 नवंबर 2010

जब तिलियार में मिल बैठे यार ....रोहतक ब्लॉगर्स बैठक ..some photos cliked by jhaji




रोहतक का तिलियार झील परिसर एवं पिकनिक स्पॉट गवाह बना उन शब्दों और पंक्तियों के आपस में मिल बैठने का गवाह बन गया जब श्री राज भाटिया जी ने आग्रहपूर्वक सबको बुला भेजा । पूरी रिपोर्ट पढने के लिए तो आपको मेरे साथ बने रहना होगा फ़िलहाल तो आप मेरे मोबाइल से ली गई कुछ तस्वीरें देखिए , मुझे पता है कि मेरे अलावा शायद और किसी ने वो तस्वीरें नहीं ली हैं जो मैंने खींच डाली , देखिए ...

मगर एक दिलचस्प बात इससे पहले कि आप फ़ोटो देखें ..जैसे ही कल मैंने अपने मोबाईल को लाकर कंप्यूटर टेबल पर रखा तो कंप्यूटर चहक कर मोबाइल से बोला , "क्यों बे , ये कल तो सिर्फ़ मेरी बैंड बजाए हुए था , अब तो तेरी हालत भी कुछ कुछ मेरी सी हुई जा रही है ,"। मोबाईल मरी हुई आवाज में बोला ," हां यार पता नहीं इतनी फ़ोटो क्यों और कैसे लेता है ये ,मेरा तो पेट खराब हो गया है ।कंप्यूटर बोला , अबे तेरा तो बस एक दिन न , मगर भाई अब इन फ़ोटो के साथ ये जाने कितने दिन मुझे और उलझाए रहेगा ..हाय बुरे फ़ंसे ब्लॉगर के हाथों



बिल्लू के पकौडों की मशहूर दुकान , रोहतक

गर्मागरम पकौडे तैयार होते हुए



तिलियार झील का सूचना पट्ट

कॉंफ़्रेंस हॉल, जहां बैठक जमी


और ये जम गई गोल बैठक

गोल बैठक जारी है

भोजन के समय अपनी अपनी मस्ती में सब

इस थाली में अभी मिठाई , आइसक्रीम और बहुत कुछ नहीं डाला गया है


कॉंफ़्रेंस हॉल के बाहर
और ये रही तिलियार झील

एक नज़ारा और देखिए


लो जी ये भी यहां बैठक जमाए हुए हैं

और एक ग्रुप फ़ोटो , बाएं से बैठे हुए श्रीमती डॉ अरुणा कपूर , श्रीमती निर्मला कपिला जी , श्रीमती संजू तनेजा जी , श्रीमती संगीता पुरी जी , श्री योगेंद्र मौद्गिल जी , बाएं से खडे हुए श्री सतीश सक्सेना , डॉ. कपूर,केवल राम , श्री राज भाटिया ,श्री ललित शर्मा , श्री संजय भास्कर , श्री खुशदीप सहगल और श्री राजीव तनेजा , । जो फ़ोटो में नहीं हैं , श्री अलेबला खत्री , श्री नरेश सिंह राठौड , हरदीप राणा , श्री अंतर सोहिल , श्री नीरज जाट जी , डॉ अकेला , और खुद मैं

ये लीजीए गांधी जी के तीन ब्लॉगर भी हैं


एक ताज़ी पोस्ट की तैयारी करते सारे मास्टर शैफ़



वापसी में मिली , प्रकाशपर्व की झांकी भी


एक फ़ोटो हमारी भी झेलिए

साथ चलने वाले

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